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T20 बनाम ODI बनाम टेस्ट: नियमों में सबसे बड़ा फ़र्क 2026

क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे तेज़ रास्ता यह है कि पहले T20 के नियम सीखें, फिर ODI और टेस्ट पर जाएँ, क्योंकि तीनों फॉर्मैट एक ही 42 नियमों की संहिता पर चलते हैं। इस संहिता को लंदन का मैरिलबो...

3 अक्टूबर 2026 5 min read
T20 बनाम ODI बनाम टेस्ट: नियमों में सबसे बड़ा फ़र्क 2026
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T20 बनाम ODI बनाम टेस्ट: नियमों में सबसे बड़ा फ़र्क 2026

क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सबसे तेज़ रास्ता यह है कि पहले T20 के नियम सीखें, फिर ODI और टेस्ट पर जाएँ, क्योंकि तीनों फॉर्मैट एक ही 42 नियमों की संहिता पर चलते हैं। इस संहिता को लंदन का मैरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) संभालता है, और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) अपनी खेल-शर्तों से इसे फॉर्मैट के हिसाब से ढालती है। T20 में हर टीम को 20 ओवर मिलते हैं और एक गेंदबाज़ अधिकतम 4 ओवर फेंक सकता है; ODI में 50 ओवर और 10 ओवर प्रति गेंदबाज़; टेस्ट में दो पारियाँ और पाँच दिन, यानी रोज़ कम से कम 90 ओवर। पिच 22 गज़ (20.12 मीटर) की होती है और एक ओवर में 6 वैध गेंदें गिनी जाती हैं। वाइड और नो-बॉल पर अतिरिक्त रन मिलता है, और सफेद गेंद के फॉर्मैट में नो-बॉल के बाद फ्री हिट आती है। एक बात पक्की रखें: मोहल्ले या कॉर्पोरेट टूर्नामेंट के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए खेलने से पहले आयोजक के नियम पढ़ें।

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि क्रिकेट के नियम "इतने उलझे" हैं कि इन्हें समझने में बरसों लगते हैं। मैं साफ़ कह दूँ: यह भ्रम है, और इसे फैलाने वाले वही हैं जो आपको चाय की दुकान की बहस में हराना चाहते हैं। आँकड़े देखिए: पूरी संहिता में 42 नियम हैं, पर मैच देखने के लिए आपको रोज़ इनमें से दस-बारह ही चाहिए। बाकी नियम अंपायर की मेज़ की चीज़ हैं, आपकी नहीं। हम दोनों यहाँ मैच समझने आए हैं, रुलबुक रटने नहीं। "गेंदबाजी विश्लेषण" पर हम हर मैच की समीक्षा इसी सोच से लिखते हैं: पहले वे नियम जो नतीजा बदलते हैं, फिर बाकी सब। इस लेख में हम तीनों फॉर्मैट को रैंक करेंगे, यानी आपको किस क्रम में सीखना है, और आख़िर में आपके पास वह नक्शा होगा जिससे अगला मैच आप एक अंदरूनी खिलाड़ी की नज़र से देखेंगे। जो "आधिकारिक" जानकारी आपको बाकी जगह भारी शब्दों में मिलती है, उसका सार यहीं है।

a packed Indian cricket stadium at dusk under floodlights, fans waving flags as batsmen walk out

सीधी बात पर आते हैं। अगर आप चाहें कि यह गाइड आपके अगले मैच तक साथ चले, तो आगे बढ़ने से पहले एक नज़र इधर भी डाल लीजिए।

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टॉप 3 फॉर्मैट-नियम एक नज़र में: कौन-सा पहले सीखें?

पहले सीखने के क्रम में पहले नंबर पर T20 है, दूसरे पर ODI और तीसरे पर टेस्ट। T20 में कम नियम तुरंत काम आते हैं, ODI रणनीति के नियम जोड़ता है, और टेस्ट बाकी दोनों की जड़ है। यही क्रम सबसे कम मेहनत में सबसे ज़्यादा समझ देता है।

इस रैंकिंग का मेरा फ़ैसला बिना किसी हिचक के है, और आगे कारण भी मिलेंगे। पहले पूरी सूची देख लें:

  1. T20: कुल मिलाकर सबसे बेहतर। 20 ओवर, 4 ओवर प्रति गेंदबाज़, पहले 6 ओवर का पावरप्ले।
  2. ODI: रणनीति सीखने के लिए सबसे अच्छा। 50 ओवर, 10 ओवर प्रति गेंदबाज़, तीन चरणों वाला पावरप्ले (10-30-10)।
  3. टेस्ट: गहराई के लिहाज़ से सबसे किफ़ायती। दो पारियाँ, पाँच दिन, रोज़ कम से कम 90 ओवर, नतीजा चार तरह का।

ध्यान दें कि तीनों में टीम 11 खिलाड़ियों की होती है और गेंद एक ही नियम से "वैध" मानी जाती है। फ़र्क सिर्फ़ यह है कि हर फॉर्मैट में कुछ पाबंदियाँ जुड़ती या हटती हैं। इसलिए इन्हें तीन अलग खेल मानना भी उतनी ही बड़ी भूल है जितनी यह मानना कि नियम बहुत कठिन हैं। MCC की संहिता का इतिहास भी यही बताता है: पहली लिखित संहिता 1744 की है, और तब से हर बदलाव उसी ढाँचे के ऊपर चढ़ा है। Wikipedia: Laws of Cricket पर इस इतिहास का पूरा ब्योरा मिलता है, और हिंदी में सार के लिए हिंदी विकिपीडिया का लेख देखा जा सकता है, हालाँकि उस पन्ने पर स्रोतों की कमी का नोट लगा है, इसलिए अंतिम बात के लिए MCC और ICC के मूल दस्तावेज़ ही देखिए।

#1 T20: कुल मिलाकर सबसे बेहतर, क्योंकि हर नियम यहाँ दिखता है

T20 में हर पारी 20 ओवर की होती है, एक गेंदबाज़ अधिकतम 4 ओवर फेंकता है, और पहले 6 ओवर में सिर्फ़ दो क्षेत्ररक्षक 30 गज़ के घेरे के बाहर रह सकते हैं। इसके बाद पाँच क्षेत्ररक्षक बाहर जा सकते हैं।

यह हिसाब एक ऐसा तथ्य खोलता है जो ज़्यादातर लेख नहीं बताते: प्रति गेंदबाज़ ओवर की सीमा हमेशा पारी के कुल ओवरों का पाँचवाँ हिस्सा होती है। 20 ओवर में 4, 50 ओवर में 10, और अगर बारिश से मैच 16 ओवर का रह जाए तो हर गेंदबाज़ को सिर्फ़ 3.2 ओवर, यानी 3 ओवर और 2 गेंदें, मिलती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि 20 और 50 ओवर, दोनों में कप्तान को कम से कम पाँच गेंदबाज़ चाहिए, और जिस टीम के पास चार भरोसेमंद गेंदबाज़ हों, वह कागज़ पर ही कमज़ोर है। गेंदबाज़ी में बदलाव पर नज़र रखना शुरू करेंगे तो आप कमेंटेटर से एक कदम आगे चलेंगे।

T20 में फ्री हिट भी सबसे ज़्यादा चर्चा में रहती है। गेंदबाज़ का अगला पैर रेखा के बाहर पड़े तो नो-बॉल होती है, एक रन जुड़ता है, और अगली गेंद पर बल्लेबाज़ सिर्फ़ रन आउट, गेंद दो बार मारने या क्षेत्ररक्षण में बाधा जैसे तरीकों से ही आउट हो सकता है। बोल्ड, कैच या LBW से नहीं। टाई होने पर नतीजा सुपर ओवर से निकलता है: हर टीम एक ओवर खेलती है। एक और नई चीज़ है स्टॉप क्लॉक, जिसमें ICC की सफ़ेद गेंद वाली शर्तों के तहत गेंदबाज़ी करने वाली टीम को पिछला ओवर ख़त्म होने के 60 सेकंड के भीतर अगला ओवर शुरू करने को तैयार रहना होता है। दो चेतावनियों के बाद हर उल्लंघन पर 5 रन का जुर्माना लगता है। यानी धीमी ओवर गति अब सिर्फ़ "जुर्माने की चेतावनी" नहीं, सीधे स्कोरबोर्ड की कीमत है।

a bowler in blue jersey releasing the ball at the crease, umpire watching the front foot line closely

अब बात उस हिस्से की जो ज़्यादातर लोग चूक जाते हैं, यानी नतीजे के बाद का विश्लेषण कैसे पढ़ें। इसके लिए हमारा बाकी का सिलसिला भी देखना चाहिए।

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#2 ODI: रणनीति सीखने के लिए सबसे अच्छा, क्योंकि पावरप्ले तीन चरणों में बँटा है

ODI में हर टीम को 50 ओवर मिलते हैं और पावरप्ले तीन चरणों में चलता है: ओवर 1 से 10 में दो क्षेत्ररक्षक घेरे के बाहर, ओवर 11 से 40 में चार, और ओवर 41 से 50 में पाँच। इसी बँटवारे से पारी की रणनीति बनती है।

यहाँ मेरा दो-टूक फ़ैसला सुनिए: अगर आप खेल की "चाल" समझना चाहते हैं तो ODI सबसे अच्छा शिक्षक है। T20 इतनी तेज़ी से भागता है कि बीच के ओवरों की कहानी नज़र नहीं आती, और टेस्ट इतना लंबा है कि शुरुआत में धैर्य टूट जाता है। ODI में 11 से 40 ओवर का वह लंबा बीच का हिस्सा, जिसमें सिर्फ़ चार क्षेत्ररक्षक बाहर रहते हैं, तय करता है कि टीम 280 तक पहुँचेगी या 330 तक। शोध-जैसी सटीकता से कहें तो यही चरण है जहाँ "स्ट्राइक रोटेशन", यानी एक-दो रन लेकर स्ट्राइक बदलते रहना, सबसे ज़्यादा काम आता है, और इसी वजह से नियम पढ़ने वाला दर्शक यहाँ बिना कमेंट्री के भी अंदाज़ा लगा लेता है।

बारिश से प्रभावित मैचों में डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) विधि संशोधित लक्ष्य तय करती है। इसका सरल सार यह है कि टीम के पास बचे ओवर और बचे विकेट, दोनों को "संसाधन" मानकर उनका प्रतिशत निकाला जाता है। दूसरी तरफ़, नो-बॉल, वाइड और फ्री हिट के नियम T20 जैसे ही हैं। रिव्यू सिस्टम यानी DRS में गेंद की गति के पूर्वानुमान की जाँच होती है, और जब गेंद विकेट को सिर्फ़ छू रही हो तो फ़ैसला मैदानी अंपायर के निर्णय पर ही टिकता है, जिसे "अंपायर्स कॉल" कहा जाता है। विस्तार से ICC की आधिकारिक वेबसाइट पर खेल-शर्तों के दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। विश्लेषण पढ़ने की आदत के लिए हमारा [Internal Link: मैच समीक्षा कैसे पढ़ें] वाला खंड भी देखें।

#3 टेस्ट: गहराई के लिहाज़ से सबसे किफ़ायती, यानी कम नियम, ज़्यादा समझ

टेस्ट में दोनों टीमें दो-दो पारियाँ खेलती हैं, मैच अधिकतम पाँच दिन चलता है और रोज़ कम से कम 90 ओवर फेंके जाने होते हैं। नतीजा जीत, हार, ड्रॉ या बहुत कम बार टाई हो सकता है। ओवरों की कोई सीमा प्रति पारी नहीं होती।

टेस्ट को मैं "सबसे किफ़ायती" इसलिए कहता हूँ कि एक बार इसके नियम समझ लिए तो बाकी दोनों फॉर्मैट उसका सरल रूप लगते हैं। यही मेरा विपरीत निष्कर्ष है, और इसके पीछे तर्क है: T20 के नियम याद रखने में आसान ज़रूर हैं, पर टेस्ट के तीन नियम आपको असली खेल से जोड़ते हैं। पहला, नई गेंद। 80 ओवर के बाद फ़ील्डिंग टीम नई गेंद ले सकती है, और यही फ़ैसला अक्सर दिन का रुख़ बदल देता है। दूसरा, फॉलो-ऑन। पाँच दिन के टेस्ट में दूसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने वाली टीम 200 या उससे ज़्यादा रन पीछे हो तो आगे वाली टीम का कप्तान उसे दोबारा बल्लेबाज़ी के लिए कह सकता है। तीन या चार दिन के मैच में यह अंतर 150, दो दिन में 100 और एक दिन में 75 रन है। तीसरा, घोषित पारी, यानी कप्तान किसी भी समय पारी खत्म घोषित कर सकता है। यह तीनों नियम ODI या T20 में मौजूद ही नहीं हैं, इसलिए टेस्ट देखने वाला अपने आप ज़्यादा जानकार दिखता है।

players in whites walking off a green cricket ground at sunset as the umpires remove the bails

अब तक जो पढ़ा, उसे अगली बार मैच में परखने के लिए तैयार रहिए। कोई भी खिलाड़ी हो या दर्शक, एक बार यहाँ और झाँक लेना बुरा नहीं रहेगा।

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बल्लेबाज़ आउट कितने तरीकों से होता है?

संहिता के अनुसार बल्लेबाज़ नौ तरीकों से आउट हो सकता है: बोल्ड, कैच, LBW, रन आउट, स्टंप्ड, हिट विकेट, गेंद को दो बार मारना, क्षेत्ररक्षण में बाधा डालना और टाइम्ड आउट। इनमें कैच, बोल्ड और LBW सबसे आम हैं।

इन नौ तरीकों में से तीन ऐसे हैं जिन पर सबसे ज़्यादा विवाद होता है, इसलिए इन्हें अलग से समझ लीजिए। LBW के लिए गेंद का लेग स्टंप के बाहर पिच न होना, बल्लेबाज़ के पैड पर लगना और विकेट की सीध में होना, तीनों शर्तें चाहिए। कैच के मामले में गेंद ज़मीन छूने से पहले क्षेत्ररक्षक के हाथ में आनी चाहिए, और विकेटकीपर के पीछे से लिया गया कैच भी उतना ही वैध है। उदाहरण के लिए, ESPN के स्कोरकार्ड में अफ़ग़ानिस्तान A और भारत A के दूसरे मैच में प्रभसिमरन सिंह 84 रन बनाकर आउट हुए जब ऑफ़ब्रेक गेंद पर पैडल-स्कूप करते हुए उनके बल्ले का हल्का सा स्पर्श हुआ और विकेटकीपर ने कैच पकड़ लिया। उस समय स्कोर 167/3 था। यानी "हल्का सा स्पर्श" भी पूरा आउट है, और यही वह बारीकी है जो नए दर्शक अक्सर नहीं मानते।

सूची के रूप में याद रखने का आसान तरीका:

  • गेंदबाज़ का श्रेय: बोल्ड, LBW, कैच, स्टंप्ड, हिट विकेट।
  • दौड़ से जुड़ा: रन आउट।
  • बल्लेबाज़ की अपनी भूल: गेंद दो बार मारना, बाधा डालना, टाइम्ड आउट।

क्रिकेट में रन और बाउंड्री कैसे गिने जाते हैं?

विकेटों के बीच दौड़कर लिया गया हर पूरा रन एक गिना जाता है। गेंद ज़मीन छूकर सीमा-रेखा पार करे तो 4 रन, और बिना टप्पा खाए पार करे तो 6 रन। वाइड, नो-बॉल पर एक रन अतिरिक्त मिलता है, जबकि बाई और लेग-बाई अलग से गिने जाते हैं।

पर "अतिरिक्त रन" की भी कई परतें हैं जिन्हें अक्सर गड़बड़ाया जाता है। बाई वे रन हैं जो गेंद के बल्ले या शरीर से लगे बिना विकेटकीपर के पास से निकलने पर बनते हैं, जबकि लेग-बाई तब मिलती है जब गेंद बल्लेबाज़ के शरीर से लगकर निकले और उसने शॉट खेलने की कोशिश की हो। दोनों बल्लेबाज़ के खाते में नहीं, "अतिरिक्त" में जाते हैं। ओवरथ्रो के रन भी असली रन माने जाते हैं, और ग़लत तरीके से फेंकी गई गेंद पर बने अतिरिक्त रन भी कुल स्कोर में जुड़ते हैं। अगर गेंद मैदान पर रखे फ़ील्डिंग टीम के हेलमेट को छू जाए तो बल्लेबाज़ी करने वाली टीम को 5 पेनल्टी रन मिलते हैं। नियम की यह छोटी बारीकी कई बार मैच का नतीजा तय करती है।

हमारे [Internal Link: क्रिकेट स्कोरिंग की पूरी गाइड] में आप इन रन-श्रेणियों के उदाहरण और स्कोरशीट की भाषा देख सकते हैं, और [Internal Link: IPL कवरेज और खिलाड़ी आंकड़े] में देखिए कि ये अतिरिक्त रन असल मैचों में कितने भारी पड़ते हैं।

a scoreboard at a cricket ground displaying runs, wickets and overs as the sun sets behind it

हमने रैंकिंग कैसे तय की?

हमने तीन कसौटियों पर वज़न बाँटा: सीखने की आसानी 40 प्रतिशत, मैच में नियम दिखने की बारंबारता 35 प्रतिशत, और अन्य फॉर्मैट में काम आने की क्षमता 25 प्रतिशत। इसी जोड़ ने T20 को पहले, ODI को दूसरे और टेस्ट को तीसरे स्थान पर रखा।

ये वज़न मेरी अपनी पसंद-नापसंद नहीं, बल्कि पाठक के असली उपयोग से निकले हैं। जो व्यक्ति पहली बार नियम सीख रहा है, उसके लिए सबसे बड़ी बाधा है "इतना सब याद रखना"। इसलिए आसानी को सबसे ज़्यादा वज़न मिला। दूसरी कसौटी यह देखती है कि नियम मैच में कितनी बार सचमुच आता है: पावरप्ले और नो-बॉल हर T20 मैच में मिलते हैं, जबकि फॉलो-ऑन किसी टेस्ट में शायद एक बार आए। तीसरी कसौटी पर टेस्ट सबसे आगे है, क्योंकि उसके नियम बाकी में लगभग हर जगह लागू होते हैं। आप चाहें तो वज़न बदलकर अपनी रैंकिंग बना लें, पर ध्यान रखें कि जिस कसौटी को आप सबसे ज़्यादा वज़न देंगे वही आपका नतीजा तय करेगी।

यह ज़रूरी है कि आप किसी "विशेषज्ञ सूची" पर आँख मूँदकर भरोसा न करें। जाँचने का सही तरीका एक ही है: अगला मैच देखिए और गिनिए कि कितने नियम आपने पहचाने। हमारी [Internal Link: बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी रणनीति] वाली सामग्री इसी अभ्यास के लिए लिखी गई है।

आपको कौन-सा फॉर्मैट चुनना चाहिए?

अगर आप पहली बार नियम सीख रहे हैं तो T20 चुनिए। रणनीति और अंकगणित पसंद है तो ODI, और अगर धैर्य व गहराई चाहिए तो टेस्ट। गली-मोहल्ले का मैच खेलना हो तो सबसे पहले आयोजक के लिखित नियम माँगिए।

यहीं वह बात है जो ज़्यादातर गाइड छोड़ देती हैं। असली ज़िंदगी में आप ICC की संहिता पर नहीं, स्थानीय टूर्नामेंट के नियमों पर खेलेंगे। उदाहरण के लिए, कुछ आयोजित टूर्नामेंटों की नियम-पुस्तिकाओं में एक टीम में 9 खिलाड़ी (8 खेलते हैं, 1 अतिरिक्त), 16 ओवर का मैच यानी पारी में 8 ओवर, रिपोर्टिंग टाइम से 10 मिनट की प्रतीक्षा के बाद विरोधी टीम को विजेता घोषित करना, और DRS का न होना जैसे प्रावधान मिलते हैं। ऊपर की जाली (नेट) से टकराकर गेंद कैच हो जाए तो आउट, और पारी की पहली और आख़िरी गेंद पर बने रन दोगुने गिने जाने जैसे विशेष नियम भी हो सकते हैं। कुछ जगह "मैजिक ओवर" भी होता है, जिसमें बल्लेबाज़ी करने वाली टीम पहले से लक्ष्य घोषित कर देती है। इन नियमों में से कोई भी ICC का नहीं है, पर इन्हीं पर आपका मैच जीता या हारा जाएगा।

इसलिए मेरा अंतिम फ़ैसला यह है: पहले T20 से बुनियाद बनाइए, फिर ODI की रणनीति, और आख़िर में टेस्ट की गहराई। इसके बाद अपने मैदान के नियम-पत्र को पढ़िए। यही क्रम आपको "विशेषज्ञ" जैसा नहीं, असली जानकार बनाएगा। और अगर मैच के बाद का विश्लेषण पढ़ना है तो "गेंदबाजी विश्लेषण" पर रोज़ नई सामग्री मिलती है।

अगर आप आगे और गहराई में जाना चाहते हैं, तो अपना अगला कदम तय करने के लिए यह रहा आख़िरी बटन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: क्रिकेट के नियम क्या होते हैं?

A: क्रिकेट के नियम 42 नियमों की वह लिखित संहिता हैं जिसे MCC संभालता है। इसमें पिच का आकार, गेंद, ओवर, आउट होने के तरीके और अंपायर की भूमिका तय की गई है। ICC इन्हें टेस्ट, ODI और T20 की अलग खेल-शर्तों से जोड़ती है, जैसे ओवरों की संख्या और पावरप्ले। पहली लिखित संहिता 1744 की मानी जाती है, और समय-समय पर इसमें संशोधन होते रहे हैं।

Q: शुरुआत करने वाले क्रिकेट के नियम कैसे सीखें?

A: सबसे आसान तरीका है पहले T20 के बुनियादी नियम सीखना और फिर मैच देखते हुए उन्हें पहचानना। पहले हफ़्ते में ओवर, रन, आउट के नौ तरीके और वाइड-नो-बॉल सीखिए। दूसरे हफ़्ते में पावरप्ले और फ्री हिट जोड़िए। तीसरे हफ़्ते में किसी पूरे मैच का स्कोरकार्ड पढ़ने की कोशिश कीजिए, जैसे ESPN का स्कोरकार्ड, ताकि नियम असली संदर्भ में दिखें।

Q: T20 और ODI के नियमों में क्या फ़र्क है?

A: मुख्य फ़र्क ओवरों और गेंदबाज़ के कोटे का है। T20 में 20 ओवर और प्रति गेंदबाज़ अधिकतम 4 ओवर होते हैं, जबकि ODI में 50 ओवर और 10 ओवर। T20 में पावरप्ले सिर्फ़ पहले 6 ओवर का है, पर ODI में तीन चरण (10-30-10) हैं, जिनमें क्षेत्ररक्षकों की संख्या क्रमशः 2, 4 और 5 बाहर रहती है। बाकी बुनियादी नियम समान हैं।

Q: फ्री हिट पर बल्लेबाज़ आउट क्यों नहीं होता?

A: फ्री हिट उस नो-बॉल के बाद मिलती है जब गेंदबाज़ का अगला पैर रेखा के बाहर पड़ता है, इसलिए बल्लेबाज़ को लगभग सुरक्षा मिल जाती है। इस गेंद पर बोल्ड, कैच, LBW और स्टंप्ड से आउट नहीं दिया जाता। रन आउट, गेंद दो बार मारना और क्षेत्ररक्षण में बाधा डालने जैसे तरीकों से आउट अब भी संभव है। यह नियम सिर्फ़ सफेद गेंद के फॉर्मैट, यानी ODI और T20, में लागू होता है, टेस्ट में नहीं।

Q: अगर मैच टाई हो जाए तो क्या होता है?

A: सफेद गेंद के फॉर्मैट में नतीजा आम तौर पर सुपर ओवर से तय होता है, जिसमें हर टीम एक-एक ओवर खेलती है और ज़्यादा रन बनाने वाली टीम जीतती है। टेस्ट में टाई तभी होता है जब दोनों टीमों का कुल स्कोर बराबर हो और चौथी पारी पूरी हो चुकी हो, जो बहुत ही दुर्लभ है। इसके अलावा पाँचवें दिन तक कोई नतीजा न निकले तो मैच ड्रॉ घोषित होता है।

Q: स्थानीय टूर्नामेंट के नियम ICC से अलग क्यों होते हैं?

A: स्थानीय आयोजक समय, मैदान और खिलाड़ियों की उपलब्धता के हिसाब से नियम बदल लेते हैं। इसीलिए कई जगह 9 खिलाड़ी, 16 ओवर, रिपोर्टिंग टाइम पर 10 मिनट की छूट, या पहली-आख़िरी गेंद के दोगुने रन जैसे नियम मिलते हैं। खेलने से पहले आयोजक से लिखित नियम-पत्र ज़रूर लीजिए, खासकर DRS, नो-बॉल और रन आउट के बारे में, क्योंकि अंपायर का फ़ैसला वहाँ अंतिम माना जाता है।

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गेंदबाजी विश्लेषण · Editorial Archive · No. 01

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